संसद या सासत

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bharati


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सपने की हकीकत

Posted On: 9 Oct, 2012  
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“घूस लेना अपराध नहीं.” मुंबई हाई कोर्ट

Posted On: 21 Aug, 2012  
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गृहयुद्ध एक मात्र विकल्प : भयावह स्थिति

Posted On: 17 Aug, 2012  
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यदुवंशी सरकार का कहर : अश्वमेध यज्ञ

Posted On: 11 Aug, 2012  
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बिलखता भारत : सड़ता लोकतंत्र

Posted On: 26 Jul, 2012  
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विज्ञान का आश्चर्य-संसार का अजूबा- अक्षयवट

Posted On: 14 Jun, 2012  
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बजे दुन्दुभी आज़ादी क़ी.

Posted On: 13 Jun, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अत्यंत तीखा सच। बहुत ही कड़वा।==== बिलकुल ज़मीनी सच्चाई।==== किन्तु गले उतरना मुश्किल। ???????? अपने धूमल भविष्य को देख रोता सामाजिक मूल्य!==== अपनी लुप्त होती अस्मिता के ऊपर बिलखता पारिवारिक सम्बन्ध! =====नई एवम उन्नत प्रजाति के नाम पर अपने गले को घोंटता हुआ देख आहें भरती मानवता!-----बिलकुल सही। अब पशुओं की तरह मनुष्यों से भी उन्नत किश्म की प्रजाति उत्पन्न कराने के लिए जबरदस्ती औरतो का बलात्कार करवाया जाएगा। तथा देश हित में इसे आवश्यक बताकर इसके लिए क़ानून बनाया जाएगा। दबंग एवम आततायियों द्वारा इसी क़ानून के आड़ में अर्थात उन्नत प्रजाति उत्पन्न करने के नाम पर मन चाही औरत का बलात्कार किया जायेगा। और इस प्रकार थोड़ी बहुत बची मानवता सदा के लिए दम तोड़ देगी। एक विकराल एवं भयावह सच्चाई का दर्शन आप ने कराया। किन्तु झूठी आन बान शान के लिए इस सच्चाई से जान बूझ कर मुँह मोड़े इन्शान!=====अपनी संतान एवं कुल-खानदान की समाप्ति मंज़ूर, किन्तु इस थोथे उत्थान के आदर्श का अनुकरण कर सभ्य कहलाने की दौड़ में अवश्य शामिल होना है=====.

के द्वारा: पण्डित आर. के. राय पण्डित आर. के. राय

भारती जी, मैं आपकी बात से पूर्णतया सहमत हूँ।आज के परिवेश में लड़कियों ने फैशन के नाम पर केवल नग्नता को अंगीकार कर रही हैं ।आज उनकी आदर्श नारी सीता ,सावित्री ,इंदिरा गाँधी,कल्पना चावला नहीं बल्कि बिपाशा बासु,मल्लिका शेरावत,और सनी लेओन हैं ।सड़कों पर,माल्स में पार्कों में पर खुले आम बॉयफ्रेंड के साथ चूमा चाटी करना आम सा हो गया है । आजकल जीन्स कमर के नीचे इतना ज्यादा आ गई कि उनके अधोवस्त्र तक के दर्शन होते हैं इसे वह फैशन कहती हैं । निश्चित तौर पर संस्कार और सामजिक वर्जनाओं का पालन होता आवश्यक है ।।आज हनी सिंह की गानों पर ऐतराज जताया जा रहा है लेकिन जब 'चोली के पीछे ' और 'सरकाय लो खटिया' जैसे गाने शुरू हुए तभी से इसका जोरदार विरोध होता तो आज यह नौबत नहीं आती। विवेक मनचन्दा ,लखनऊ

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

आदरणीय श्री भारती जी बहुत बहुत धन्यवाद जो आप को पवित्र अक्षयवट का गुणगान करने का अवसर मिला. मै सही बताऊँ, इस वृक्ष का दर्शन मैं कर चुका हूँ. और मै ही इस पवित्र गाथा क़ी प्रस्तुति का श्रेय लेना चाहता था. किन्तु जब मैंने देखा कि आप इसके बारे में लिखने का मन बना चुके है तों मन क़ी बात मन में ही रख कर मैं चुप हो गया. वैसे आप ने इस वृहद् गाथा को बहुत ही चतुराई से संक्षिप्त कर के प्रस्तुत किया है. मैंने जो लिख रखा है वह बहुत ही विशाल है. और बड़े बड़े तीन ब्लॉग में ही हो पाता. चलिए, अपनी अपनी किश्मत. भगवान ने आप को मौक़ा दिया. सब को आप ने अपने इस लेख के माध्यम से इस पवित्र अक्षयवट का दर्शन कराया. आप पुण्य के भागी बने. धन्यवाद.

के द्वारा: प्रकाश चन्द्र पाठक प्रकाश चन्द्र पाठक

श्री पाठक जी आप जिस मंदिर की बात कर रहे है, वह मंदिर केवल मूर्तियों तक ही सीमित नहीं है. इसमें अनेक तरह के पुजारी है. इसके अनेक भक्त है. प्रसाद लेने वाले बहुत है. इनमें से बहुत सारे श्रद्धालु प्रसाद पा गए है. और अभी और प्रसाद की आशा लगाए बैठे है. कुछ नए भक्त भी पंक्ति बद्ध हो गए है. इनकी संख्या इतनी है कि इसके निराकरण का एक ही उपाय दिखाई दे रहा है कि इस मंदिर को ध्वस्त कर एक ऐसा मंदिर निर्मित किया जाय जहां प्रसाद वितरण की व्यवस्था न होकर केवल मंदिर में दान ही दिया जा सके. फिर निः स्पृह भक्त एवं कल्याण कारी देवताओं के द्वारा मंदिर साधना एवं शान्ति का स्थल बन सकता है. वैसे आप का हुंकार बड़ा घनघोर है.

के द्वारा: प्रकाश चन्द्र पाठक प्रकाश चन्द्र पाठक

Please refer to your comment and remind the days of gods and demons who quarreled together. I say these things because you have accepted / granted the parliament as "Mandir" where deities are expected to reside. In this regard I will wish to have your kind attention towards the following a few lines- Are the जनप्रतिनिधि deities to worship them? I think they are selected / elected to serve the people and not to be adored. They also take such an oath at the time of parliamentary parade. By the way if I agree with your consent that parliament is a मंदिर where deities are expected to reside and by mistake some Rascal is elected / selected as जनप्रतिनिधि, should not he be murdered and cut into pieces as Rahu who had been offered the Nectar by Gods by mistake was cut into pieces as Rahu & ketu? Do you think such representatives should be murdered in the same way as Rahu was cut into pieces? I am confident you will not agree. So I will suggest you not pay the regard of Mandir to that of the Parliament. Parliament is framed to serve the people and not to rule over people. Parliament has to find the necessities of the people and not to thrust the necessities upon the people. Do you think the Parliament as Temple where Demons / Rascals / Savages / bruits reside? I think never. Parliament is never a Temple but a mouth piece of the people to speak the language of the people and not its own. Do you think Indian Parliament as temple where representatives fight with one another just like सांड भैंसा कुत्ता neglecting the manners, methods and status? Do you think Indian Parliament as Temple where the final decision of Supreme court and Indian president is over ruled? Refer the case of Afazal Guru. May you tell me a single name of any representative from a poor family? Why does a man invests a lot of money to be a Parliament member either by hook or by crook ? Have you ever thought over the reason behind this profoundly? why does a member from a poor family dare to fight the election? Don't you remind that a rotten egg infects others? Thats' why the part of the body is cut and separated if the malignancy is detected there in. Yes Parliament was temple in the days of Gods. But then the parliament member was not having any Pushpak viman or any Rath to go to the parliament. Even one member named as Vidur who was also a member of Parliament was hard impressed with the need of money though born in a Royal Family. you are suggested to think over the sharp truth down to the earth. And ultimately thank you to give your opinion. BHARATI

के द्वारा: bharati bharati




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